लोरी
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निंदियॉ आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...
पलकों के पिछे
एक सपनों की नगरी ||२||
नगरी वो लगती
मुझको प्यारी
आजा रे आजा....
सपनों की नगरी
का पता अजब है ||२||
बादल गाव से होके जाना है |
बादल गाव जाए निली घाटी,
दाएँ बाए झुकती मुडती
आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...
इक बादल के उपर चडके
इक बादल से दाएँ मुडके
इक बादल से आगे आगे
आजा रे आजा...
निंदियॉ आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...
पलकों पे छा जा |...
ला लाला ला ला
ला लाला ला ..
स्वाती फडणीस ...................२००४
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