Tuesday, February 26, 2008

लोरी

लोरी
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निंदियॉ आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...

पलकों के पिछे
एक सपनों की नगरी ||२||

नगरी वो लगती
मुझको प्यारी
आजा रे आजा....

सपनों की नगरी
का पता अजब है ||२||

बादल गाव से होके जाना है |
बादल गाव जाए निली घाटी,
दाएँ बाए झुकती मुडती

आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...

इक बादल के उपर चडके
इक बादल से दाएँ मुडके
इक बादल से आगे आगे


आजा रे आजा...

निंदियॉ आजा रे आजा
पलकों पे छा जा |...

पलकों पे छा जा |...
ला लाला ला ला
ला लाला ला ..


स्वाती फडणीस ...................२००४

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