Saturday, May 10, 2008

पहेलीसा दिल

पहेलीसा दिल
.


सावन के झोकेसा गिला धुंदला दिल |
बु.दोसे झलकते रंगोसा अन छुवा दिल |

रंगबिरंगे शिशे के तुकडों की नक्काशीसा
तुकडे तुकडे से ही बनता है दिल |

डाल पे बैठे मैना जैसा गाता गुनगुनाता
सावला सुंदरसा बेगाना अपना दिल |

बागान मे खिलती हुई कली बहारका
रोज खिलते मुरझाते फुलोसा दिल |

सुखदुख: के धागोसे बुंदा मुलायम-खर्रारा
उनी शॉलसा चाहा अन चाहा दिल |

निली आसमासा गहरे हलके रंगो से बना
जादूकरता करवाता पहेलीसा दिल |


स्वाती फडणीस................. १०-०३-२००८

0 comments: