गुनगुनाते जीना है |
.
मुशकिले तो आती है |
निराश कर जाती है |
आशा के चिराग बन
हम को तो जलना है |
यादो के निशा छोड
पंछी उड जाते है |
निशानो मे पंछी देख
गुनगुनाते जीना है |
मुरझाने दे फुल
मुरझा के महकना है |
पलो को कर दफन
कल फिर उगना है |
स्वाती फडणीस ....................... ११-०३-२००८
Saturday, May 10, 2008
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