Saturday, May 10, 2008

गुनगुनाते जीना है |

गुनगुनाते जीना है |
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मुशकिले तो आती है |
निराश कर जाती है |

आशा के चिराग बन
हम को तो जलना है |

यादो के निशा छोड
पंछी उड जाते है |

निशानो मे पंछी देख
गुनगुनाते जीना है |

मुरझाने दे फुल
मुरझा के महकना है |

पलो को कर दफन
कल फिर उगना है |


स्वाती फडणीस ....................... ११-०३-२००८

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