अजनबी
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ना तुम समझो गे
ना कुछ हम कहेंगे
सौ बार चले इन राहों पे
फिर भी अनजान रहे
एक से ही तुफान आये
अकेले लोटाये हमने
पिछडते गये रास्ते
ना तुम कुछ समझ सके
ना हि बतलाया गया हमसे
स्वाती फडणीस ..................... १९९८
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