Friday, May 23, 2008

पहेलीसा दिल

पहेलीसा दिल
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सावन के झोंकें सा गीला धुंधला दिल
बूंदों से झलकते रंगों सा अन-छुआ दिल

रंग-बिरंगे शीशे के टुकडों की नक्काशी सा
टुकड़े टुकड़े से ही बनता हैं यह दिल

डाल पर बैठे मैना जैसा गाता गुनगुनाता
सांवला सुन्दर सा बेगाना अपना यह दिल

बागों मै खिलती कली की बहार का
रोज खिलते मुरझाते फूलों सा यह दिल

सुख-दुःख के धागों से गुंथा मुलायम-करारा
उनी शाल सा चाहा अन चाहा यह दिल

नीला गहरा आसमां पर हलके रंगों से बना
जादू करता करवाता पहेली सा यह दिल


स्वाती फडणीस................. १०-०३-२००८

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